History of VINURUDHA

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History of VINURUDHA The VINURUDHA Institute , informally known as the Vinurudha Family , is an academic and educational organization based in Patna, Bihar, India . It was founded in 2013 by Mrs. Kiran Devi , along with the core committee members of the Vinurudha Family . The institute was established with a vision to provide real, practical education that helps human beings lead meaningful lives in society. Its core mission is to build discipline, awareness, and empowerment among students — enabling them not only to succeed in their career and health but also to become job creators instead of job seekers, thereby contributing to a healthy and corruption-free society in Bihar and across India. Academic Structure The academic system of VINURUDHA is divided into two main parts: Career-Oriented Education Health-Oriented Education Career-Oriented Courses Under the career-oriented stream, VINURUDHA runs the following courses: 1. Education / Academic Arts: Class XI...

Sarswati Puja सरस्वती पूजा, बसंत पंचमी



 सरस्वती पूजा

बसंत पंचमी के त्योहार के आगमन के साथ ही हिंदू समाज में सरस्वती पूजा की धूम मच जाती है। यह पूजा मां सरस्वती, ज्ञान, कला, और विद्या की देवी को समर्पित है। यह पर्व हिंदू धर्म के आदर्शों में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है और छात्रों के जीवन में ज्ञान के प्रकाश को आरम्भ करता है।

सरस्वती पूजा का उत्सव बसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का संकेत भी होता है। इस दिन मंदिरों, पाठशालाओं, और विद्यालयों में सरस्वती माता की पूजा-अर्चना की जाती है।

पूजा के दिन स्कूल और कॉलेजों में बच्चे और छात्र अपने लेक्चर हॉल को सजाते हैं। उन्हें रंग-बिरंगी चादरें बिछानी जाती हैं, जिसमें सरस्वती माँ की मूर्ति स्थापित की जाती है। छात्र और शिक्षक इस दिन विद्या का आशीर्वाद मांगते हैं और अपने जीवन में उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।

सरस्वती पूजा के दिन ध्यान और प्रार्थना का माहौल बना रहता है। छात्र अपनी शिक्षा को लेकर मां सरस्वती से आशीर्वाद मांगते हैं और अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने की कामना करते हैं।

इस उत्सव को बच्चों के जीवन में शिक्षा के महत्व को समझाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह उन्हें यह बताता है कि विद्या का महत्व क्या है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए अपनी शिक्षा को कैसे महत्वपूर्ण बनाना चाहिए।

इस खास दिन पर छात्रों को ध्यान और नम्रता के साथ सरस्वती माँ का ध्यान करना चाहिए। यह संदेश देता है कि विद्या का सम्मान करना और उसे महत्व देना हमारे समाज में आदर्श गुण हैं।

इस उत्सव के अलावा, सरस्वती पूजा के दिन लोग विद्यालयों और पाठशालाओं में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं। इन प्रतियोगिताओं में विभिन्न कलाओं, लेखन, गायन और नृत्य जैसी क्षेत्रों में बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं।

बसंत पंचमी के उत्सव के साथ ही हिंदू समाज में सरस्वती पूजा का महत्वपूर्ण आयोजन होता है। यह पूजा मां सरस्वती, ज्ञान, कला, और विद्या की देवी को समर्पित है। इस उत्सव का आयोजन हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण परंपरा में सम्मिलित है और विद्या के महत्व को साबित करता है।

सरस्वती पूजा का इतिहास:
सरस्वती पूजा का पर्व बसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक होता है। इस दिन शिक्षा, कला, और विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इस दिन को विद्या के महादेव ब्रह्मा की शक्ति सरस्वती का अवतरण माना जाता है।

सरस्वती पूजा का आयोजन:
पूजा के दिन स्कूल और कॉलेजों में बच्चे और छात्र अपने लेक्चर हॉल को सजाते हैं। उन्हें रंग-बिरंगी चादरें बिछाई जाती हैं, जिसमें सरस्वती माँ की मूर्ति स्थापित की जाती है। छात्र और शिक्षक इस दिन विद्या का आशीर्वाद मांगते हैं और अपने जीवन में उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।


सरस्वती माँ की आरती

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदा विजयवाली भवनि, विद्यादायिनी नमो नमः॥

ध्यान श्रष्टि करते सदा विश्वविधात्री।
विद्या की देवी, धरा धरणी के भाग्यविधात्री॥

ब्रह्माजी के मन में विराजत तिनकी शोभा।
विद्या के धाम में, नाम हमारा लेती भोगा॥

स्वर्ण कमल का शिर सुंदर, बैठे हैं हाथी गोदावरी के तीर पर।
मां सरस्वती आपकी आरती, सबके मन की करे विश्व सुखवारी॥

श्वेत पुष्प माला सजाकर, ध्यान से जिसको चारों ओर देखा।
शिर पर हैं मुकुट, कमल नयना, हँसती फुलवारी चाँदनी रातों को बिसराती॥

आपके चरणों में स्वर्ग हैं, आपके चरणों में मोक्ष हैं।
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदा विजयवाली भवनि, विद्यादायिनी नमो नमः॥

आरती करती जय सरस्वती, जय जय सरस्वती माता।
सदा सुखदायिनी, विद्या के धाम में आप विराजता हैं॥

सरस्वती स्तुति स्लोक:
"या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥"

इन संस्कृत श्लोकों का हिंदी में अर्थ निम्नलिखित है:

  1. "या कुन्देन्दुतुषारहारधवला" - "वह जो सफेद कुंदन्दु के तुषार से बने हुए हार की तरह शोभायमान है,"

  2. "या शुभ्रवस्त्रावृता" - "वह जो शुद्ध सफेद वस्त्रों में आच्छादित है,"

  3. "या वीणावरदण्डमण्डितकरा" - "वह जिनके हाथ में वीणा और मणि से सजे हुए डंड हैं,"

  4. "या श्वेतपद्मासना" - "वह जो श्वेत कमल पर बैठी है,"

  5. "या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता" - "वह जो ब्रह्मा, विष्णु, और शंकर आदि देवताओं द्वारा हमेशा पूजित होती है,"

  6. "सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा" - "भगवती सरस्वती जो सभी ज्ञान-हीनता को हटाती है, उस माँ को मुझे सदा पालन करें।"

  7. वह मां सरस्वती, भगवती, हमें सभी जड़ता से मुक्ति प्रदान करें |

संक्षिप्त में:
सरस्वती पूजा के दिन ध्यान और प्रार्थना का माहौल बना रहता है। छात्र अपनी शिक्षा को लेकर मां सरस्वती से आशीर्वाद मांगते हैं और अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने की कामना करते हैं। इस उत्सव के अलावा, प्रतियोगिताओं का आयोजन भी होता है जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। यह उन्हें अधिक उत्साहित करता है और उनके विकास में मदद करता है।

इस पवित्र उत्सव के दिन हम सभी को मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त हो। यह उत्सव हमें यह याद दिलाता है कि विद्या और ज्ञान ही हमारी सबसे बड़ी धन हैं। इसे समझने के साथ ही, हमें अपनी शिक्षा और ज्ञान के प्रति समर्पित रहना चाहिए, ताकि हमारा जीवन सफल और समृद्ध हो सके।


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